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एक प्रेरणा दायक कहानी - जैसा करोगे वैसा भरोगे

 जैसा करोगे वैसा भरोगे -:  यह कहानी  है सरला के पड़ोस में रहने वाली सरिता की  । एक  दिन सरला सरिता से मिलने उसके घर आती है ।   " और बता सरिता कैसी है  ? कैसी तबीयत है तेरी ?  घुटने का दर्द कैसा है तेरा  ? " कहते हुए सरला ने अपने बगल में रहने वाली अपनी सहेली सरिता से पूछा ।   " क्या बताऊं सरला बहन ............. एक तो इस बुढ़ापे में कुछ काम होता नहीं है और बहू भी कुछ काम की नहीं है  । अपनी जिम्मेदारियों से भागकर अपने पति के साथ हमसे अलग किराए के घर में रहती है  । यहां तो मैं ही अकेली हूं । अब क्या करूं  ? , कैसे करूं ?  कुछ समझ में नहीं आता है ।  इन बूढ़ी हड्डियों में अब इतनी ताकत नहीं रह गई है । " कहते हुए सरिता रोने लग जाती   है ।   ":अरे चुप हो जा सरिता ।  रो-रो कर क्यों सबसे अपनी बहू की बुराई करते रहती है । तेरी एक ही इकलौती बहू है जो कि जरूरत के समय तेरे पास आना नहीं चाहती है ।  अब तो सुधर जा ।  अब रोने से क्या फायदा  । याद है ना तुमको तुमने अपनी बहू के ...

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